Nike Air Jordans इतने महंगे क्यों हैं? 😱 एयर जॉर्डन की सच्चाई | Sahil Verma
यह मीम तो आपको याद ही होगा, "8,000 के शूज हैं। 80,000 के तेरा घर जाएगा इसमें।" लोगों ने इस वीडियो का खूब मजाक बनाया था। लेकिन आपको पता है, एमसी स्टैंड जिस शूज की बात कर रहे थे, वो सच में $80,000 का ही था। इस शूज का नाम है एयर जॉर्डन।
फरवरी 2024 में एयर जॉर्डन के छह स्नीकर्स का ऑक्शन हुआ था, और ये जूते बिके थे $8 मिलियन यानी करीब ₹67 करोड़ में। और ये पहली बार नहीं हुआ था। पिछले साल अप्रैल 2023 में एयर जॉर्डन 13 का ऑक्शन हुआ था, और ये जूते $2.2 मिलियन यानी करीब ₹18 करोड़ में बिके थे। सबसे हैरानी की बात ये है कि इतना महंगा होने के बावजूद भी ये जूते चंद सेकंड में आउट ऑफ स्टॉक हो जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों है? ये जूते इतने महंगे क्यों बिकते हैं? लोग इनके पीछे पागल क्यों हैं? और नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन ने इन जूतों को बैन क्यों किया था?
एयर जॉर्डन की सफलता का राज
2020 में जब दुनिया कोविड पेंडेमिक से जूझ रही थी, तब स्पोर्ट्स सेक्टर की हर कैटेगरी की सेल नीचे चली गई थी। लेकिन एयर जॉर्डन ने उस मुश्किल समय में भी लगभग 20% का ग्रोथ हासिल किया, जिससे नाइकी ने $3.7 बिलियन का रेवेन्यू कमाया। आखिर इसके सक्सेस का राज क्या है?
ज्यादातर लोगों को लगता है कि शायद क्वालिटी बहुत अच्छी होगी। नो डाउट, इन स्नीकर्स को बनाने में हाईएस्ट क्वालिटी मटेरियल का इस्तेमाल होता है और इनके डिजाइन भी काफी इनोवेटिव होते हैं। पर क्या सच में ये इतने महंगे होते हैं कि एक जोड़ी जूते की कीमत लाखों में पहुंच जाए? बिल्कुल नहीं। असल में, जो चीज इन स्नीकर्स को इतना महंगा बनाती है, वो है एयर जॉर्डन की लेगेसी। और ये लेगेसी कोई 2-4 दिन में नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे सालों की मेहनत, प्लानिंग और ढेर सारी स्ट्रेटजीस का हाथ है।
मुख्य बातें
- एयर जॉर्डन की लेगेसी और ब्रांड वैल्यू ही उन्हें इतना महंगा बनाती है।
- माइकल जॉर्डन और नाइकी के बीच का कॉन्ट्रैक्ट बास्केटबॉल और स्नीकर इंडस्ट्री में एक गेम-चेंजर साबित हुआ।
- एनबीए द्वारा एयर जॉर्डन 1 को बैन करने की घटना को नाइकी ने मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल किया।
- स्नीकर कल्चर और स्नीकर हेड्स की वजह से इन जूतों की डिमांड और कीमत बढ़ी।
- एयर जॉर्डन 3 ने माइकल जॉर्डन को नाइकी के साथ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
एयर जॉर्डन की शुरुआत: 1980 का दशक
एयर जॉर्डन की कहानी शुरू होती है 1980 में, जब अमेरिका में बास्केटबॉल की फील्ड में एडिडास और कनवर्स का राज था। उस समय के सारे पॉपुलर बास्केटबॉल प्लेयर्स जैसे लैरी बर्ड, मैजिक जॉनसन और करीम अब्दुल जब्बार इन्हीं दो ब्रांड्स के सिग्नेचर शूज पहना करते थे। बास्केटबॉल में सिग्नेचर शूज का मतलब होता है उस प्लेयर को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाना, क्योंकि खेल के दौरान वो प्लेयर उसी ब्रांड का शूज पहनता है और कंपनी उसे पैसे देती है।
अमेरिका में बास्केटबॉल सबसे पॉपुलर स्पोर्ट्स में से एक होने के कारण, हर स्पोर्ट्स शूज बनाने वाली कंपनी इस फील्ड में आना चाहती थी। 80 के दशक में एडिडास और कनवर्स पहले से ही एस्टैब्लिश ब्रांड थे, जबकि नाइकी इस फील्ड में नया था और अपने लिए एक स्टार प्लेयर की तलाश में था।
माइकल जॉर्डन और नाइकी का मिलन
उस समय बास्केटबॉल हिस्ट्री के सबसे बड़े लेजेंड माइकल जॉर्डन भी तब तक अपनी कोई खास पहचान नहीं बना पाए थे। लेकिन नाइकी के मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, सनी बोकारेरो, ने जॉर्डन को कॉलेज में बास्केटबॉल खेलते देखा था और वो समझ गए थे कि जॉर्डन इस खेल के अगले स्टार बनने वाले हैं।
1984 में जब जॉर्डन एनबीए में सिलेक्ट हुए, तो सनी जॉर्डन को नाइकी का कॉन्ट्रैक्ट देना चाहते थे। यह एक रिस्की फैसला था क्योंकि जॉर्डन उस वक्त कोई बहुत बड़े प्लेयर नहीं थे और उन्होंने कोई प्रोफेशनल गेम भी नहीं खेला था। लेकिन सनी ने किसी तरह नाइकी मैनेजमेंट को जॉर्डन के साथ काम करने के लिए मना लिया।
हालांकि, जॉर्डन को मनाना बाकी था। जॉर्डन एडिडास के फैन थे और चाहते थे कि उनका पहला कॉन्ट्रैक्ट एडिडास से हो। लेकिन एडिडास ने कुछ साल पहले ही अपने फाउंडर एडोल्फ डैसलर को खो दिया था, जिससे कंपनी बुरे दौर से गुजर रही थी। साथ ही, एडिडास का मैनेजमेंट जॉर्डन से लंबी हाइट वाले प्लेयर के साथ डील करना चाहता था, इसलिए उन्होंने जॉर्डन को कोई सीरियस ऑफर नहीं दिया।
एडिडास के बाद जॉर्डन के पास कनवर्स का ऑप्शन था, क्योंकि उन्होंने अपने करियर में कनवर्स के ही शूज इस्तेमाल किए थे। कनवर्स ने जॉर्डन को ऑफर तो दिया, पर वो उन्हें पसंद नहीं आया। जॉर्डन चाहते थे कि कनवर्स उनके लिए शूज की एक नई रेंज बनाए और उन्हें डिजाइन और इनोवेशन में भी शामिल किया जाए। लेकिन कनवर्स पहले से ही लैरी बर्ड और मैजिक जॉनसन जैसे स्टार प्लेयर्स के साथ काम कर रहा था, इसलिए वो जॉर्डन जैसे नए प्लेयर को इतना अटेंशन नहीं दे सकते थे। नतीजा, जॉर्डन ने कनवर्स का ऑफर भी ठुकरा दिया।
इस बीच, नाइकी जॉर्डन को बार-बार अप्रोच कर रहा था, पर वो उन्हें इग्नोर कर रहे थे क्योंकि उन्हें नाइकी जैसी नई कंपनी में कोई इंटरेस्ट नहीं था। आखिरकार, जॉर्डन की मां ने उन्हें समझाया कि वो कम से कम एक बार नाइकी का ऑफर सुन लें।
ऐतिहासिक कॉन्ट्रैक्ट और एयर जॉर्डन 1
उस वक्त न तो जॉर्डन को और न ही नाइकी को अंदाजा था कि इस मीटिंग में वो कितना बड़ा इतिहास रचने जा रहे हैं। नाइकी ने माइकल जॉर्डन को 5 साल के लिए $2.5 मिलियन और हर जूते पर 25% रॉयल्टी का ऑफर दिया, जो उस वक्त एनबीए का सबसे बड़ा शूज कॉन्ट्रैक्ट था। हैरानी की बात यह थी कि इतना बड़ा कॉन्ट्रैक्ट किसी फेमस स्टार प्लेयर को नहीं, बल्कि एक नए प्लेयर को दिया जा रहा था जिसने अभी तक एनबीए का एक भी मैच नहीं खेला था।
जॉर्डन को इस ऑफर की सबसे अच्छी बात यह लगी कि नाइकी उनके सजेशंस के लिए पूरी तरह ओपन था, यानी वो शूज के डिजाइन और इनोवेशन में भी शामिल रह सकते थे। इसलिए, उन्होंने तुरंत इस कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कर दिया। और इस तरह शुरुआत हुई उस लेगेसी की जो आज तक चली आ रही है।
नाइकी जॉर्डन पर एक बहुत बड़ा रिस्क ले रहा था, इसलिए उनकी कुछ शर्तें भी थीं। शर्त यह थी कि एनबीए में अपने तीन साल के अंदर जॉर्डन को इन तीन में से किसी एक अचीवमेंट को हासिल करना होगा: रुकी ऑफ द ईयर अवार्ड, ऑल स्टार अवार्ड, या एनबीए सीजन में 20 पॉइंट्स पर गेम का एवरेज मेंटेन करना। अगर जॉर्डन इनमें से किसी एक को भी हासिल नहीं कर पाते, तो कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया जाता। पूरा प्रेशर माइकल जॉर्डन पर था।
इन्हीं शर्तों के साथ जूते बनाने पर काम शुरू हुआ और शूज की इस नई लाइनअप को नाम मिला 'एयर जॉर्डन'। 'एयर' इसलिए क्योंकि नाइकी अपने जूतों के सोल में हवा को कंप्रेस करके भर देता था, जिससे वो काफी लाइट वेट फील होते थे और उनकी कुशनिंग भी बढ़ जाती थी। नाइकी ने इसे 'एयर सोल' का नाम दिया था।
कई एक्सपेरिमेंट्स के बाद, 1985 की शुरुआत में नाइकी ने अपना पहला एयर जॉर्डन शूज लॉन्च किया, जिसे एयर जॉर्डन 1 का नाम दिया गया। यह उस समय के दूसरे बास्केटबॉल शूज से बिल्कुल अलग था। उस वक्त बास्केटबॉल के लगभग सभी शूज पूरी तरह से वाइट होते थे, लेकिन एयर जॉर्डन 1 को ब्लैक और रेड के कॉम्बिनेशन से बनाया गया था, जिसके चलते इस पर सभी का ध्यान जाता था।
एनबीए का बैन और नाइकी की मार्केटिंग
सब कुछ प्लान के अकॉर्डिंग चल रहा था, लेकिन तभी नाइकी के सामने एक बड़ी परेशानी आई। फैंस के साथ-साथ एनबीए अथॉरिटी का भी इस शूज पर ध्यान गया। एनबीए ने एयर जॉर्डन 1 को लॉन्च होते ही बैन कर दिया। उस वक्त एनबीए का रूल था कि सभी शूज में कम से कम 51% वाइट कलर होना जरूरी है, जबकि एयर जॉर्डन 1 में सिर्फ 23% वाइट कलर का इस्तेमाल किया गया था।
एयर जॉर्डन का पहला ही शूज इस तरह बैन हो जाना नाइकी के लिए एक बड़ा झटका था। लेकिन नाइकी ने इस बैन को एक अपॉर्चुनिटी की तरह देखा। उन्हें पता था कि लोग एयर जॉर्डन 1 को काफी पसंद कर रहे हैं, इसलिए बैन होने की खबर को उन्होंने पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने एक कमर्शियल बनाया जिसमें यह मैसेज दिया गया कि भले ही एनबीए इन जूतों को बैन कर दे, पर यह आपको पहनने से नहीं रोक सकता। इस कैंपेन की वजह से एयर जॉर्डन 1 'द बैंड वन' के नाम से पॉपुलर हो गया।
इसके अलावा, नाइकी ने माइकल जॉर्डन को हर मैच में यही जूते पहनकर खेलने को कहा। हालांकि, इसके लिए माइकल जॉर्डन पर हर गेम में $5000 का फाइन लगता था, जिसे नाइकी बिना किसी दिक्कत के भर रहा था। उन्हें जो पब्लिसिटी इस कंट्रोवर्सी से मिल रही थी, उसके सामने $5000 कुछ भी नहीं था।
सच तो यह था कि एयर जॉर्डन 1 को बैन किया ही नहीं गया था, बल्कि उस पर सिर्फ पेनाल्टी लग रही थी और नाइकी ने अपने कमर्शियल के जरिए जानबूझकर यह बैन होने वाली अफवाह फैलाई थी।
माइकल जॉर्डन का शानदार प्रदर्शन और एयर जॉर्डन की बिक्री
माइकल जॉर्डन पर नाइकी ने जो दांव खेला था, वो भी पूरी तरह से उनके फेवर में आया। नाइकी ने कॉन्ट्रैक्ट में जो तीन में से एक अचीवमेंट हासिल करने की शर्त रखी थी, माइकल जॉर्डन ने अपने पहले ही सीजन में उन तीनों अचीवमेंट्स को हासिल कर लिया था। एनबीए के पहले ही सीजन में माइकल जॉर्डन ने करोड़ों लोगों को दीवाना बना दिया था।
इसका नतीजा यह हुआ कि लॉन्च होने के सिर्फ 6 हफ्ते के अंदर नाइकी ने $15 लाख जोड़ी एयर जॉर्डन 1 बेच दिए थे। उनका टारगेट शुरुआत के 3 साल में केवल $3 मिलियन कमाना था, लेकिन एयर जॉर्डन 1 लोगों के बीच इतना पॉपुलर हुआ कि एक साल के अंदर इसकी सेल्स $126 मिलियन को क्रॉस कर गई। यह इतनी बड़ी सक्सेस थी कि इसके बारे में नाइकी ने कभी सोचा भी नहीं था।
स्नीकर कल्चर और एयर जॉर्डन का डिजाइन
इन जूतों की सक्सेस के पीछे केवल माइकल जॉर्डन या नाइकी की मार्केटिंग स्ट्रेटजी ही नहीं थी, बल्कि एयर जॉर्डन शूज का शानदार डिजाइन भी इसकी कामयाबी का एक बहुत बड़ा कारण था। लेट 70s के दौरान अमेरिका में हिप-हॉप कल्चर की शुरुआत हुई थी, और हिप-हॉप आर्टिस्ट के लिए फंकी स्नीकर्स उनके स्टाइल का एक अहम हिस्सा बन गए थे। उनके फैंस भी अब स्नीकर पहनना शुरू कर देते हैं, और इस तरह अमेरिका में एक स्नीकर कल्चर की शुरुआत हुई, जहां इन लोगों को 'स्नीकर हेड्स' के नाम से जाना जाता था।
ये लोग स्नीकर्स को सिर्फ पहनने के लिए नहीं खरीदते थे, बल्कि उनका कलेक्शन भी बनाते थे, ठीक वैसे ही जैसे शौकीन लोग कार्स और बाइक्स का कलेक्शन बनाते हैं। स्नीकर हेड्स में नए स्नीकर्स खरीदने की होड़ मची रहती थी और जैसे ही मार्केट में कोई नया स्नीकर लॉन्च होता था, तो ये तुरंत उसके कई यूनिट्स खरीदकर दूसरे स्नीकर हेड्स को मुंह मांगी कीमत पर बेच देते थे। इनकी वजह से इन जूतों की कीमत 100 से 1000 गुना तक बढ़ जाती थी। यह स्नीकर कल्चर अब इंडिया तक भी आ चुका है।
नाइकी को पता था कि अगर इस स्पेस में कुछ बड़ा करना है, तो स्नीकर हेड्स का दिल जीतना होगा। इसलिए, जब उन्होंने एयर जॉर्डन लाइनअप तैयार किया, तो उन्होंने अपने जूतों की परफॉर्मेंस के साथ-साथ लुक्स पर भी ध्यान दिया। जब एयर जॉर्डन 1 को लॉन्च किया गया था, तो स्नीकर हेड्स उसके डिजाइन और लुक के दीवाने हो गए।
एयर जॉर्डन 2 की असफलता और एयर जॉर्डन 3 का उदय
लेकिन नाइकी की यह सक्सेस ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई क्योंकि एयर जॉर्डन लाइनअप का दूसरा शूज, एयर जॉर्डन 2, बुरी तरह फेल हो गया। नौबत तो यहां तक आ गई थी कि एयर जॉर्डन 2 की वजह से माइकल जॉर्डन नाइकी के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने वाले थे।
एयर जॉर्डन 1 की मैसिव सक्सेस के बाद, नाइकी पर प्रेशर था कि उनका अगला स्नीकर इससे भी ज्यादा अच्छा होना चाहिए। इसलिए नाइकी ने इस शूज को डिजाइन करने के लिए अपने दो बेहतरीन डिजाइनर पीटर मूर और ब्रूस किलगोर को चुना था। पीटर मूर ने एयर जॉर्डन 1 को डिजाइन किया था और ब्रूस किलगोर ने एयरफोर्स 1 को, जो उस वक्त तक नाइकी के मोस्ट सेलिंग शूज थे।
एयर जॉर्डन 2 को डिजाइन करते समय, पीटर मूर और ब्रूस किलगोर के दिमाग में बस एक ही चीज थी कि उन्हें एक ऐसा जूता बनाना है जो परफॉर्मेंस बेस्ड हो, लेकिन साथ ही दिखने में इतना शानदार और लग्जरियस हो कि लोग उसे थ्री-पीस सूट के साथ भी पहन सकें। कई महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने इस जूते को तैयार किया।
1986 में इसके लॉन्च के समय, एयर जॉर्डन 2 को काफी लोगों ने पसंद किया, पर इसे नापसंद करने वाले लोग ज्यादा थे, जिनमें माइकल जॉर्डन का नाम भी शामिल था। इस शूज में नाइकी का लोगो स्पष्ट रूप से इस्तेमाल नहीं किया गया था, जो हैरान करने वाली बात थी। साथ ही, क्वालिटी को बेहतर करने के चक्कर में इसका प्रोडक्शन इटली में किया गया था, जिससे जूते का प्रोडक्शन कॉस्ट काफी ज्यादा हो गया और इसे $100 के रिटेल प्राइस पर लॉन्च किया गया, जो उस वक्त एक बहुत बड़ी रकम थी (एयर जॉर्डन 1 का रिटेल प्राइस $65 था)।
एयर जॉर्डन 2 की वजह से कंपनी को बहुत ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ, पर यह उतना सक्सेसफुल नहीं हो पाया जितना एयर जॉर्डन 1 हुआ था। माइकल जॉर्डन के हिसाब से यह वजन में काफी भारी था, और वो इस बात से भी निराश थे कि एयर जॉर्डन 2 की डिजाइनिंग में उनकी सलाह को कोई वैल्यू नहीं दी गई थी। इसलिए, उन्होंने 1989 में अपना 5 साल का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद नाइकी को छोड़ने का मन बना लिया था।
इससे नाइकी को बहुत ज्यादा नुकसान होता। इसलिए, कंपनी ने सबसे पहले पीटर मूर और ब्रूस किलगोर को एयर जॉर्डन की डिजाइनिंग से हटा दिया और उनकी जगह एक यंग डिजाइनर टिंकर हटफील्ड को लेकर आए, जिन्हें एयर जॉर्डन 3 डिजाइन करने का काम सौंपा गया।
कई महीनों की मेहनत के बाद यह जूता बनकर तैयार हुआ और इसे माइकल जॉर्डन को दिखाया गया। टिंकर खुद फ्लाइट लेकर कैलिफोर्निया पहुंचे और जैसा कि उम्मीद थी, इस जूते की पहली ही झलक ने माइकल जॉर्डन का दिल जीत लिया था, क्योंकि इसे बनाने में उनकी सभी रिक्वायरमेंट्स को ध्यान में रखा गया था। माइकल की रिक्वायरमेंट्स के अकॉर्डिंग, इस जूते का वेट कम रखा गया और यह एक मिड-टॉप शूज था। साथ ही, एयर जॉर्डन 3 पहला स्नीकर था जिसमें जॉर्डन ब्रांड का आइकॉनिक जंपमैन लोगो इस्तेमाल किया गया था।
एयर जॉर्डन 3 नाइकी के लिए एक लाइफ-सेवर साबित हुआ। इसने माइकल जॉर्डन के नाइकी से अलग होने के इरादे को पूरी तरह बदल दिया और साथ ही यह स्नीकर हेड्स को भी बहुत ज्यादा पसंद आया। इस सक्सेस के बाद, नाइकी और माइकल जॉर्डन ने एक ऐसी लेगेसी बनाई जिसके लिए लोग हमेशा मुंह मांगी कीमत देने को तैयार रहते हैं।
एयर जॉर्डन की सबसे खास बात यह है कि मार्केट चाहे कितनी भी ऊपर या नीचे क्यों न जाए, ये अपने शूज के प्राइस कभी भी कम नहीं करते और न ही कभी डिस्काउंट देते हैं। यही वजह है कि जब कोई व्यक्ति ₹1 लाख का शूज खरीदता है, तो उसे यह यकीन होता है कि इसकी कीमत वाकई ₹1 लाख ही है, क्योंकि अगर वो चाहे तो कुछ समय इस जूते को अपने पास रखकर और ज्यादा कीमत पर बेच सकता है।
बाकी दोस्तों, इसी तरह अगर आप जानना चाहते हैं कि इंडिया के अंदर कैसे कैंपस शूज ने नाइकी और एडिडास जैसे ब्रांड को पीछे छोड़कर इंडिया का सबसे बड़ा शूज मैन्युफैक्चरर बना, तो आप आई बटन पर क्लिक करके उस वीडियो को देख सकते हैं। वैसे दोस्तों, आपको इन जूतों पर लाखों खर्च करना वर्थ लगता है या नहीं, हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बाकी आज के लिए बस इतना ही।